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अलीगढ़ का वह गांव जहां शिक्षा ने बदली किस्मत, लिम्का बुक में दर्ज है नाम

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अलीगढ़ जिले के जवां ब्लॉक में स्थित धोर्रा माफी गांव अपनी शैक्षिक उपलब्धियों के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। लगभग 10 से 12 हजार की आबादी वाले इस गांव को एशिया के सबसे पढ़े-लिखे गांवों में गिना जाता है। यहां करीब 90 प्रतिशत से अधिक लोग शिक्षित हैं, जो किसी भी ग्रामीण क्षेत्र के लिए बेहद प्रेरणादायक उदाहरण है।

धोर्रा माफी की पहचान केवल उच्च साक्षरता दर तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश-विदेश में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रही हैं। इस गांव से बड़ी संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और आईएएस अधिकारी निकल चुके हैं। गांव के लगभग 80 प्रतिशत लोग देश और विदेश के विभिन्न संस्थानों और कंपनियों में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

गांव के लोगों का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो जीवन को बेहतर बना सकता है। यही सोच यहां के हर परिवार में दिखाई देती है। माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। गांव में बच्चों को शुरू से ही पढ़ाई के महत्व के बारे में बताया जाता है, जिससे उनमें आगे बढ़ने की प्रेरणा पैदा होती है।

धोर्रा माफी में शिक्षा का माहौल इतना सकारात्मक है कि यहां के युवा बड़े लक्ष्य तय करते हैं और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। कई छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग और सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। गांव के वरिष्ठ और शिक्षित लोग भी युवाओं को समय-समय पर मार्गदर्शन देते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के चलते वर्ष 2002 में धोर्रा माफी गांव का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था। यह उपलब्धि न केवल गांव के लिए बल्कि पूरे अलीगढ़ जिले के लिए गर्व की बात है। इस रिकॉर्ड ने गांव की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया।

धोर्रा माफी की सफलता के पीछे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की निकटता भी एक बड़ा कारण मानी जाती है। विश्वविद्यालय के पास होने के कारण कई प्रोफेसर, डॉक्टर और शिक्षित लोग इस गांव में आकर बस गए। इससे यहां शिक्षा का माहौल और अधिक मजबूत हुआ। बच्चों को पढ़े-लिखे और अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन मिलने लगा, जिससे उनकी सोच और लक्ष्य दोनों बड़े होते गए।

गांव में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण यहां सामाजिक और आर्थिक विकास भी देखने को मिला है। बेहतर शिक्षा के कारण लोगों को अच्छी नौकरियां मिलीं और गांव के कई परिवार आर्थिक रूप से भी मजबूत हुए हैं। यही वजह है कि आज धोर्रा माफी को प्रतिभाओं का गढ़ कहा जाता है।

आज के समय में धोर्रा माफी उन गांवों में शामिल है जो यह साबित करते हैं कि शिक्षा ही असली विकास की कुंजी है। यहां की कहानी यह संदेश देती है कि यदि समाज मिलकर शिक्षा को प्राथमिकता दे तो किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

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