Latest News
जमाना क्या सोचेगा – इस डर से बाहर निकलो
हम में से ज़्यादातर लोग ज़िंदगी के किसी न किसी मोड़ पर ये सोचते हैं — “लोग क्या कहेंगे?” यही एक सोच है जो हमारे कदमों को रोक देती है, सपनों को अधूरा छोड़ देती है और हमें वही बना देती है जो जमाना चाहता है, न कि जो हम बनना चाहते हैं।
जमाना हमेशा कुछ न कुछ कहेगा
दुनिया की एक सच्चाई यह है कि जमाना कभी शांत नहीं बैठता। अगर तुम असफल हो जाओ, तो लोग हँसेंगे — कहेंगे कि तुमसे नहीं हुआ। और अगर तुम सफल हो जाओ, तो वही लोग जलने लगेंगे, बहाने ढूँढेंगे कि तुम्हें मौका ज़्यादा मिला या किस्मत साथ दे गई।
इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि दुनिया की सोच को तुम कभी नहीं बदल सकते, लेकिन अपने फैसले खुद लेकर अपनी दिशा ज़रूर तय कर सकते हो।
अपनी सोच को प्राथमिकता दो
किसी ने सही कहा है — “अगर तुम हर किसी को खुश करने में लगे रहोगे, तो खुद कभी खुश नहीं रह पाओगे।”
इसलिए ज़िंदगी में फैसले इस आधार पर लो कि तुम्हारे दिल को क्या सही लगता है, न कि दूसरे क्या सोचेंगे।
हर इंसान की परिस्थितियाँ, सपने और संघर्ष अलग होते हैं। जो रास्ता तुम्हारे लिए सही है, ज़रूरी नहीं कि वो किसी और को सही लगे — और यह बिल्कुल ठीक है।
लोगों की सोच से ऊपर उठो
जब तुम अपनी राह खुद बनाते हो, तो शुरुआत में लोग मज़ाक उड़ाते हैं, फिर आलोचना करते हैं, और आखिर में ताली बजाते हैं।
इतिहास गवाह है — जिन्होंने “जमाना क्या सोचेगा” की परवाह नहीं की, वही लोग कुछ बड़ा कर पाए।
फिर चाहे वो ए.पी.जे. अब्दुल कलाम हों, स्वामी विवेकानंद हों या एलन मस्क — सबने समाज की सीमाओं से ऊपर उठकर अपनी पहचान बनाई।
“जमाना क्या सोचेगा” ये सवाल तुम्हें रोक सकता है, लेकिन “मुझे क्या चाहिए” ये सवाल तुम्हें आगे बढ़ाएगा।
इसलिए अब वक्त है डर से निकलने का — सोचो, करो, और दिखा दो कि तुम्हारे फैसले तुम्हारी ज़िंदगी के मालिक हैं, न कि जमाने की राय।
-
Latest News4 months agoजीवन बदलने वाले 5 सबक, जो हम भूल जाते हैं
-
धर्म4 months agoसावन के अंतिम सोमवार को कैसे करें शिव की पूजा, सम्पूर्ण विधि
-
Latest News6 months agoवृंदावन: बांके बिहारी मंदिर के अलावा भी ये हैं दर्शनीय स्थान
-
Latest News3 months ago2025 का नया ट्रेंड: Quiet Life Movement क्यों लोग अब सुकून को मान रहे हैं असली लग्ज़री?
