धर्म
तीसरे सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव का जलाभिषेक
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान हर सोमवार का अपना विशेष महत्व होता है। सावन के तीसरे सोमवार का भी भक्तगणों के लिए एक अनुपम और गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन शिव कृपा प्राप्त करने और मनोकामनाएं पूर्ण करने का एक सुनहरा अवसर माना जाता है। इस दिन शिव भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं।
सावन के तीसरे सोमवार का महत्व
सावन के हर सोमवार को शिव पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। तीसरे सोमवार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस समय तक सावन का महीना अपने चरम पर होता है और वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार अधिक होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव जी और माता पार्वती की एक साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और अविवाहितों को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें धन, धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
यह भी माना जाता है कि सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शिव पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। इसलिए इस दिन शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और वे विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
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जलाभिषेक का सही तरीका
जलाभिषेक भगवान शिव की पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। जलाभिषेक करने के लिए कुछ नियमों और विधियों का पालन करना आवश्यक है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
आवश्यक सामग्री
जल: सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है शुद्ध जल। गंगाजल हो तो उत्तम, अन्यथा किसी भी पवित्र नदी या शुद्ध स्रोत का जल प्रयोग किया जा सकता है।
बेलपत्र: बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं।
धतूरा और आक के फूल: ये भी शिव जी को अर्पित किए जाते हैं।
भांग: भगवान शिव को भांग अर्पित करने का भी विधान है।
शमी पत्र: शमी के पत्ते भी शिव को चढ़ाए जाते हैं।
दूध: कच्चा दूध (बिना उबाला हुआ) शिव को चढ़ाने से विशेष फल मिलता है।
दही, घी, शहद, चीनी: पंचामृत बनाने के लिए।
चंदन: शिव जी को चंदन का लेप लगाना शुभ होता है।
धूप, दीप: पूजा के लिए।
फल, मिठाई: भोग के लिए।
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जलाभिषेक की विधि
सुबह उठकर स्नान: सावन के तीसरे सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले मन में भगवान शिव का ध्यान करें और जलाभिषेक का संकल्प लें।
शिवलिंग पर जल चढ़ाएं: सबसे पहले शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल की धारा प्रवाहित करें। जल चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। ध्यान रहे कि जल अभिषेक करते समय आपका मुख उत्तर दिशा की ओर हो।
पंचामृत अभिषेक: जल के बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण) से अभिषेक करें। इसके बाद पुनः शुद्ध जल से अभिषेक करें।
अन्य सामग्री अर्पित करें: अब शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, शमी पत्र आदि अर्पित करें।
चंदन का लेप: शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।
धूप-दीप: धूप और दीप प्रज्वलित करें।
भोग लगाएं: फल और मिठाई का भोग लगाएं।
आरती: अंत में भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामनाएं उनसे कहें।
प्रदक्षिणा: शिवलिंग की परिक्रमा करें।
ध्यान रखने योग्य बातें
जलाभिषेक करते समय मन शांत और पवित्र रखें।
काले वस्त्र पहनकर जलाभिषेक न करें।
प्लास्टिक या स्टील के बर्तन का उपयोग करने से बचें। तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
शिवलिंग पर तुलसी दल न चढ़ाएं, क्योंकि यह शिव पूजा में वर्जित है।
केतकी के फूल भी शिव पूजा में वर्जित हैं।
सावन का तीसरा सोमवार भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का एक अद्भुत अवसर है। सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा निश्चित रूप से फलदायी होती है और महादेव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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