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लहजे बता देते हैं, परवरिश हुई है या सिर्फ पाले गए हो
मानव जीवन में परवरिश एक पूरी प्रक्रिया है। यह वह अदृश्य शक्ति है जो हमारे व्यवहार, हमारे लहज़े और हमारे व्यक्तित्व को आकार देती है। हम कैसे बोलते हैं, कैसी बातें करते हैं, और दूसरों के प्रति कैसा रवैया रखते हैं—यह सब हमारी परवरिश की गहराई को दिखाता है।
इसीलिए कहा जाता है, “लहज़े बता देते हैं, परवरिश हुई है या सिर्फ़ पाले गए हो।”
परवरिश और पालन-पोषण में बअंतर
बहुत से लोग सोचते हैं कि बच्चे को खाना दे देना, कपड़े पहना देना और स्कूल भेज देना ही पर्याप्त है। यह पालन-पोषण है, परवरिश नहीं।
परवरिश वह होती है जहाँ इंसान को इंसानियत भी सिखाई जाती है—सम्मान, विनम्रता, सहानुभूति, और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता।
- पालन-पोषण शरीर को बड़ा करता है।
- परवरिश व्यक्तित्व को बड़ा करती है।
लहज़ा क्यों बनता है पहचान?
जब कोई इंसान बोलता है, तो उसके शब्दों से पहले उसका लहज़ा असर डालता है।
एक नम्र लहज़ा बताता है कि सामने वाला संस्कारों से भरा है। वहीं रूखा और कटु लहज़ा इस बात का संकेत हो सकता है कि व्यक्ति सिर्फ़ बड़ा हुआ है, लेकिन संस्कारों से नहीं सजा।
लहज़ा इंसान के भीतर की दुनिया दिखाता है:
- शिकायतें भरी आवाज़, भीतर की कड़वाहट दर्शाती है।
- प्यार और आदर भरा लहज़ा, परवरिश की मिठास का प्रमाण है।
- तिरस्कार भरी जुबान, अहंकार का आईना है।
- संयमित और शांत आवाज़, समझदारी का परिचय देती है।
परवरिश किन बातों से झलकती है?
- बात करने का ढंग
किसी से कैसे बात करते हैं, यह आपकी सबसे पहली पहचान बन जाता है। - वरिष्ठों और कनिष्ठों से व्यवहार
जो लोग उम्र, पद या हालात देखकर लहज़ा बदलते हैं, अक्सर उनकी परवरिश पर सवाल खड़े होते हैं। - क्रोध में भी संयम
गुस्सा हर किसी को आता है, पर गुस्से में भी भाषा की मर्यादा बनाए रखना सच्ची परवरिश की निशानी है। - दूसरों की भावनाओं का सम्मान
दिल की नर्मी, चेहरे की मुस्कान और शब्दों की मिठास जन्मजात नहीं होती—यह घर से मिलती है।
सिर्फ़ पाले जाने के संकेत
कुछ लोग उम्र के साथ बड़े तो हो जाते हैं, पर समझ नहीं बढ़ती।
ऐसे लोग अक्सर—
- दूसरों को अपमानित करते हैं
- हर समय रूखेपन से बात करते हैं
- छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होते हैं
- सामने वाले की भावनाओं को महत्व नहीं देते
यह सब बताता है कि वे सिर्फ़ पाले गए हैं, पर संस्कारों से नहीं निखरे।
लहज़ा आपकी विरासत है
जिस घर में आदर, प्रेम और संयम सिखाया जाता है, वहाँ के बच्चे बाद में जाकर भी उसी मूल्य को आगे बढ़ाते हैं।
लहज़ा इंसान की वह विरासत है, जिसे वह हर जगह साथ लेकर चलता है—कार्यालय, परिवार, रिश्ते, समाज, हर जगह।
इंसान का लहज़ा उसका आईना है।
यह बताता है कि वह केवल बड़ा हुआ है, या उसे सही मायनों में परवरिश दी गई है।
जीवन में सफलता, सम्मान और रिश्तों की लंबी उम्र—सब कुछ अच्छे लहज़े और विनम्र व्यवहार पर टिका है।
इसलिए अपने शब्दों और लहज़े को संवारना सिर्फ़ ज़रूरी नहीं, यह आपकी पहचान है।
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