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क्यों “शुक्र” ही इंसान को अमीर बनाता है?
अमीरः ज़िंदगी का एक गहरा सच है—किसी के पास सब कुछ नहीं होता, और कोई पूरी तरह खाली भी नहीं होता। यही कारण है कि फकीर का पेट भी खाली नहीं रहता और बादशाह की ख्वाहिशें भी कभी पूरी नहीं होतीं।
हम अक्सर अपनी कोशिशों, सपनों और ज़रूरतों से आगे बढ़ने की चाह में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि जो चीज़ें पहले से हमारे पास मौजूद हैं, उनका एहसास ही नहीं कर पाते। हम यह भूल जाते हैं कि खुशियाँ हमेशा बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि हमारे पास मौजूद छोटी-छोटी नेमतों में छिपी होती हैं।
1. कमी सबको है—और यह स्वाभाविक भी है
चाहे अमीर हो या गरीब, हर इंसान के अंदर कुछ पाने की इच्छा रहती है। यह इंसानी फितरत है कि जो मिल जाए, उसके बाद कुछ और चाहिए होता है।
लेकिन फर्क इतना है कि
- फकीर के पास कम है, पर उसके सपने सरल हैं।
- बादशाह के पास ज़्यादा है, पर उसकी ख्वाहिशें अनंत हैं।
इसलिए किसी इंसान की तृप्ति उसकी कमाई या ताकत से नहीं, बल्कि उसकी सोच और संतोष से तय होती है।
2. शुक्र—हर हाल में खुशी का राज़
शुक्र करने का मतलब सिर्फ “थैंक यू” कहना नहीं होता।
यह एक एहसास है कि—
- मेरे पास ज़िंदगी है
- मेरी साँसें चल रही हैं
- मेरे पास खाना है
- मेरा परिवार है
- मेरा घर है
- मेरे पास उम्मीदें हैं
- और सबसे बड़ी बात, मेरे पास कोशिश करने का मौका है
दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं जो आपके “कम” को भी “ज़्यादा” मानकर जी लेते।
इसलिए शुक्र अदा करना इंसान को अंदर से अमीर बना देता है, भले ही जेब में कितनी भी कमाई हो।
3. जो नहीं है, वह कल मिलेगा—जो है, वह अभी की दौलत है
हम अक्सर भविष्य की दौड़ में इतना उलझ जाते हैं कि आज की खुशी खो देते हैं।
लेकिन जिंदगी हमेशा “अभी” में होती है—कल में नहीं।
सोचिए…
अगर आप आज के लिए खुश नहीं हो सकते,
तो कल के लिए भी नहीं हो पाएँगे।
इसलिए अपने पास जो भी है—
चाहे वह छोटी सफलता हो, परिवार हो, सेहत हो, या खुद का हौसला—
उसका शुक्र अदा कीजिए।
4. शुक्र अदा करने से क्या बदलता है?
- मन हल्का होता है
- तनाव कम होता है
- रिश्तों में मिठास आती है
- आत्मविश्वास बढ़ता है
- नेगेटिव सोच कम होती है
- और इंसान खुश रहना सीख जाता है
शुक्र ऐसा दीपक है जो अंधेरों को भी रोशनी में बदल देता है।
ज़िंदगी हमेशा आपको वह देती है जिसकी आपको सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है—भले ही वह आपकी इच्छा से अलग हो।
इसलिए न फकीर को कम समझिए, न बादशाह को ज़्यादा।
हर किसी की थाली उतनी ही भरी होती है, जितनी उसके नसीब और ज़रूरत के लिए काफी हो।
हर हाल में शुक्र अदा करते रहिए,
क्योंकि खुशियां वहीं जन्म लेती हैं जहाँ दिल में संतोष और शुक्र का स्थान होता है।
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