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तारीफ़: सच्चाई और दिखावे के बीच की पतली रेखा

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कहते हैं —

“तारीफ़ किए बिना कोई खुश होता नहीं, और झूठ बोले बिना किसी की तारीफ़ होती नहीं।”

यह पंक्ति आज की हकीकत को बखूबी बयान करती है।

हर इंसान को खुशी चाहिए, मान्यता चाहिए।

और तारीफ़ वो छोटा-सा जादू है जो किसी के दिल में मुस्कान भर देता है।

लेकिन सवाल यह है — क्या हर तारीफ़ सच्ची होती है?

तारीफ़ क्यों ज़रूरी है?

इंसान के जीवन में तारीफ़ एक ईंधन की तरह काम करती है।

जब कोई हमारी मेहनत या स्वभाव की तारीफ़ करता है,

तो हमारे भीतर आत्मविश्वास और ऊर्जा दोनों बढ़ जाती हैं।

कभी-कभी एक सच्ची तारीफ़ ही किसी की ज़िंदगी बदल सकती है।

वो इंसान को यह महसूस कराती है कि उसकी मेहनत की कीमत है,

उसका अस्तित्व मायने रखता है।

झूठी तारीफ़: दिखावे की दुनिया का सच

सोशल मीडिया और दिखावे के इस दौर में तारीफ़ भी फिल्टर लगाकर दी जाने लगी है।

लोग बिना मतलब के “वाह”, “कमाल है”, “तुम तो ग्रेट हो!” जैसी बातें कह देते हैं —

बिना यह सोचे कि इन शब्दों के पीछे कोई सच्चाई है भी या नहीं।

ऐसी तारीफ़ थोड़ी देर के लिए खुशी देती है,

लेकिन रिश्तों की नींव में धीरे-धीरे झूठ का ज़हर घोल देती है।

क्योंकि जब किसी को एहसास हो जाता है कि तारीफ़ बनावटी थी,

तो भरोसा टूट जाता है।

सच्ची तारीफ़ कैसी होती है?

सच्ची तारीफ़ वो होती है जो दिल से निकलती है, दिखावे से नहीं।

उसमें ईमानदारी होती है, निरीक्षण होता है और भावना होती है।

उदाहरण के लिए —

“तुमने जो काम किया है, उसमें मेहनत साफ़ दिखाई दे रही है।”

या

“आज तुम्हारी बातों में एक अलग आत्मविश्वास झलक रहा है।”

ऐसी तारीफ़ छोटी ज़रूर लगती है, लेकिन उसका असर गहरा होता है।

तारीफ़ करने की कला

तारीफ़ करना एक कला है —

न ज़्यादा बढ़ा-चढ़ा कर बोलनी चाहिए,

न इतनी कम कि लगे मन से नहीं कही।

सही समय पर, सही शब्दों में कही गई तारीफ़

किसी के मन का बोझ हल्का कर सकती है,

और उसकी सोच को नई दिशा दे सकती है।

तारीफ़ इंसान को खुश रखने का सबसे सरल और सुंदर तरीका है।

पर जब उसमें झूठ घुल जाए, तो वह प्रेरणा नहीं, भ्रम बन जाती है।

इसलिए अगली बार जब आप किसी की तारीफ़ करें,

तो उसे शब्दों से नहीं, सच्चाई से करें।

क्योंकि सच्ची तारीफ़ सिर्फ़ किसी का दिन नहीं बदलती,

वो उसका जीवन देखने का नज़रिया भी बदल देती है।

“बिना तारीफ़ के इंसान खुश नहीं रह सकता,

और बिना सच्चाई के तारीफ़ टिक नहीं सकती।”

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