Latest News
आजकल शरीफ वही हैं, जिनके राज छिपे हुए हैं
ज़माना बदल गया है।
कभी शराफ़त का मतलब था — सादगी, ईमानदारी और साफ़ दिल।
लेकिन अब?
अब जो दिखने में शरीफ़ लगता है, उसके अंदर कितनी सच्चाई है, यह कोई नहीं जानता।
आज का दौर दिखावे का है।
हर कोई अपने चेहरे पर इमेज का मुखौटा लगाए फिर रहा है —
कोई सोशल मीडिया पर संस्कारी बनता है,
तो कोई दूसरों के सामने “सज्जन” का किरदार निभाता है।
पर असलियत?
वो उनके छिपे हुए राज़ों में दबी होती है।
शराफ़त या छलावा?
आज लोग अच्छे बनने से ज़्यादा अच्छा दिखने की कोशिश करते हैं।
कपड़ों से, बातों से, लाइफ़स्टाइल से — सब कुछ इतना “सही” दिखता है कि कोई शक नहीं करता।
पर अंदर झांको, तो हर मुस्कान के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ या कहानी मिल जाती है।
किसी के राज़ प्यार में छिपे हैं,
किसी के लालच में,
तो किसी के डर में।
और जो अपने राज़ अच्छे से छिपा ले — वही आज के समाज में “शरीफ़” कहलाता है।
असलियत दिखाने से डर क्यों?
क्योंकि सच्चाई दिखाने वाला इंसान अब कमज़ोर समझा जाता है।
जो सच बोल दे, वो “बेवकूफ़” कहलाता है,
और जो झूठ को स्टाइल में बेच दे, वही “स्मार्ट” बन जाता है।
इसलिए अब लोग अपने भीतर की गंदगी पर चुप्पी साध लेते हैं।
कहते हैं —
“नाम खराब क्यों कराऊँ?
शरीफ़ दिखता हूँ, बस वही काफी है।”
नतीजा —
समाज में अब शराफ़त की परिभाषा नहीं बची,
बस दिखावे का भ्रम बचा है।
जो जितना अपने राज़ छिपा ले,
वो उतना ही शरीफ़ कहलाता है।
सच्ची शराफ़त चेहरों से नहीं, चरित्र से झलकती है।
पर अफ़सोस —
अब लोग चेहरों को चमकाने में इतने व्यस्त हैं कि
चरित्र को सँवारना भूल गए हैं।
-
Latest News7 months agoजीवन बदलने वाले 5 सबक, जो हम भूल जाते हैं
-
धर्म7 months agoसावन के अंतिम सोमवार को कैसे करें शिव की पूजा, सम्पूर्ण विधि
-
Latest News9 months agoवृंदावन: बांके बिहारी मंदिर के अलावा भी ये हैं दर्शनीय स्थान
-
Latest News6 months ago2025 का नया ट्रेंड: Quiet Life Movement क्यों लोग अब सुकून को मान रहे हैं असली लग्ज़री?
